गहरी दोस्ती का खेल

दो महीने पहले अपने अठारहवें जन्मदिन पर सविता ने अपने चचेरे भाई राज को अपना कौमार्य दे दिया था।

अब उसका राज भैया उसे बेकरारी की हालत में निराश छोड़ कॉलेज हॉस्टल में चला गया है।

हालांकि सविता अपनी उंगलियों से अपनी उत्तेजना को शान्त करने का पूरा प्रयास करती है लेकिन अब भी उसकी योनि राज के फ़ड़कते हुए लौड़े के लिए तड़फ़ती है।

जब वह यह सोच लेती है कि उसे अब किसी भी हालत में राज का लौड़ा जल्दी नहीं मिल सकता तो तभी उसके बचपन का सबसे अच्छा दोस्त अंकित उसके घर उससे मिलने आता है।

क्या अंकित एक अच्छे दोस्त से कुछ अधिक साबित करके दिखाएगा? इस घटनाक्रम के बारे सविता के माता पिता को पता चलेगा?

इन सब बातों को जानने के लिए देखना ना भूलें सविता की गाथा की आरम्भिक कड़ी :

सविता अठारह बरस की : गहरी दोस्ती का खेल – सिर्फ़ savitabhabhi.com पर।

दो महीने पहले अपने अठारहवें जन्मदिन पर सविता ने अपने चचेरे भाई राज को अपना कौमार्य दे दिया था।

अब उसका राज भैया उसे बेकरारी की हालत में निराश छोड़ कॉलेज हॉस्टल में चला गया है।

हालांकि सविता अपनी उंगलियों से अपनी उत्तेजना को शान्त करने का पूरा प्रयास करती है लेकिन अब भी उसकी योनि राज के फ़ड़कते हुए लौड़े के लिए तड़फ़ती है।

जब वह यह सोच लेती है कि उसे अब किसी भी हालत में राज का लौड़ा जल्दी नहीं मिल सकता तो तभी उसके बचपन का सबसे अच्छा दोस्त अंकित उसके घर उससे मिलने आता है।

क्या अंकित एक अच्छे दोस्त से कुछ अधिक साबित करके दिखाएगा? इस घटनाक्रम के बारे सविता के माता पिता को पता चलेगा?

इन सब बातों को जानने के लिए देखना ना भूलें सविता की गाथा की आरम्भिक कड़ी :

सविता अठारह बरस की : गहरी दोस्ती का खेल – सिर्फ़ savitabhabhi.com पर।