सुलगते अरमान

कड़ी 95 में, दशहरे की पूर्व संध्या पर, अशोक के घर का दौरा करने वाले चाचा जी जानना चाहते हैं कि आखिर अब सविता पुराने दिनों की तरह उनके आस-पास क्यों नहीं मंडराती या सेक्स करती है। लेकिन एक ही समय में रेस्तरां का व्यवसाय और अशोक के कल्पना लोक की वजह से  हमारी भाभी इन दिनों काफी व्यस्त चल रही है! जब सविता ने चाचा जी को सभ्यतापूर्वक समझाने की कोशिश की कि वह अब  अपने जीवन में आगे बढ़ चुकी है, तो उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचती है। इसलिए अंकल जी के  अतृप्त अरमानों को संतुष्ट करने के लिए सविता कार्बन कॉपी के साथ दशहरा रात्रि मिलन का आयोजन करती है।

कड़ी 95 में, दशहरे की पूर्व संध्या पर, अशोक के घर का दौरा करने वाले चाचा जी जानना चाहते हैं कि आखिर अब सविता पुराने दिनों की तरह उनके आस-पास क्यों नहीं मंडराती या सेक्स करती है। लेकिन एक ही समय में रेस्तरां का व्यवसाय और अशोक के कल्पना लोक की वजह से  हमारी भाभी इन दिनों काफी व्यस्त चल रही है! जब सविता ने चाचा जी को सभ्यतापूर्वक समझाने की कोशिश की कि वह अब  अपने जीवन में आगे बढ़ चुकी है, तो उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचती है। इसलिए अंकल जी के  अतृप्त अरमानों को संतुष्ट करने के लिए सविता कार्बन कॉपी के साथ दशहरा रात्रि मिलन का आयोजन करती है।